मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि उत्तराखण्ड को अपराध मुक्त बनाये रखने के मिशन के अन्तर्गत पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड, दीपम सेठ के दिशा निर्देशन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ़ अजय सिंह द्वारा साइबर अपराध पीड़ितो को त्वरित न्याय दिलाने तथा अपराधिक घटना में संलिप्त साइबर अपराधियों पर प्रभावी कार्यवाही के निर्देश जारी किये गये हैं। इसी क्रम में वर्तमान में प्रचलित *ऑप्रेशन प्रहार* अभियान के तहत एसटीएफ. के अन्तर्गत 12 टीमें गठित कर साइबर ठगी में प्रयोग किये जा रहे है म्यूल बैक खातों का बड़े स्तर पर सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत एसटीएफ. की एक टीम द्वारा डिजिटल साक्ष्यों, बैंक अभिलेखों एवं तकनीकी जांच के आधार पर साइबर अपराधियों द्वारा उपयोग किए जा रहे 15 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की जांच की गई। जांच के दौरान National Cyber Crime Reporting Porta (NCRP)/ Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) पोर्टल से प्राप्त शिकायतों, तकनीकी विश्लेषण एवं बैंक खातों के सत्यापन में यह पाया गया कि कई बैंक खाते साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने, स्थानांतरित करने एवं छिपाने हेतु उपयोग किए जा रहे थे। प्रमुख मामलों में एक खाते में लगभग ₹1.53 करोड़ की ठगी से संबंधित 28 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। अन्य खातों में भी लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन एवं कई बड़ी शिकायतें दर्ज हैं। प्रमुख रूप से प्रकाश में आये म्यूल खातो के सम्बन्ध में साइबर पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा अपराध संख्या 26/2026 धारा 318(4), 61(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं धारा 66(D) IT ACT में अभियोग पंजीकृत किया गया, जिसमें साइबर अपराधियों द्वारा विभिन्न बैंको के म्यूल अकाउंट का प्रयोग कर आम लोगो के साथ 1 करोड़ 53 लाख की साइबर धोखाधड़ी की गयी थी, विवेचना के दौरान विभिन्न बैंक खातों से सम्बन्धित दस्तावेजों की जाँच तथा तकनीकी विश्लेषण आदि के उपरान्त कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए राज्य में संचालित ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ, जो भोले-भाले व्यक्तियों को कमीशन, किराया, नौकरी अथवा अन्य लालच देकर उनके बैंक खाते खरीदते थे तथा बाद में उन्हीं खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने एवं आगे ट्रांसफर करने में करते थे। अब तक उक्त गैंग के 02 सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अन्य संलिप्त व्यक्तियों की तलाश जारी है तथा कई खाताधारकों को नोटिस जारी कर पूछताछ हेतु बुलाया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोगों द्वारा अपने बैंक खाते, ATM कार्ड, पासबुक, चेकबुक, मोबाइल नंबर, सिम कार्ड एवं नेट बैंकिंग सुविधाएं लालचवश अपराधियों को उपलब्ध कराई गईं। ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
*नाम पता अभियुक्त गण*
1- दानिश अंसारी पुत्र नौशाद अंसारी निवासी मोहल्ला किला, निकट पानी की टंकी, देवबंद उत्तर प्रदेश हाल निवासी सिर्धार्थ विहार कालोनी कण्डोली थाना रायपूर देहरादून । उम्र 29 वर्ष
2- अंकित एन्थोनी पुत्र स्व0 सुरेश एन्थोनी निवासी राजीव नगर तरली कण्डोली राजपुर रोड थाना रायपुर देहरादून । उम्र 32 वर्ष
*बरामदगी*
1. 02 मोबाइल फोन
2. 03 पास बैक उत्तर प्रदेश ग्रमीण बैक
3. 04 सिम कार्ड फेक आई.डी.
*म्यूल अकाउंट**
कमीशन का लालच: आपको सोशल मीडिया या कॉल के जरिए ‘घर बैठे कमाई’ या ‘कमीशन’ का झांसा देकर आपका बैंक खाता इस्तेमाल करने के लिए कहा जाता है।
*सावधानी*
* अपना खाता किराए पर न दें: कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या नेट बैंकिंग विवरण इस्तेमाल न करने दें।
* केवाईसी (KYC) साझा न करें: बिना सत्यापन के किसी भी अज्ञात ऐप या व्यक्ति को अपना आधार, पैन या बैंक पासबुक की फोटो न भेजें।
* लालच में न आएं: यदि कोई आपके खाते में पैसे भेजकर उसे कहीं और ट्रांसफर करने या नगद निकालकर देने के बदले कमीशन दे रहा है, तो वह अपराधी हो सकता है।
* संदेह होने पर रिपोर्ट करें: यदि आपके खाते में बिना किसी जानकारी के पैसा आता है, तो तुरंत अपने बैंक और स्थानीय पुलिस को सूचित करें।
*अपील*
* आमजन अपने बैंक खातों का दुरुपयोग होने से बचाएं।
* किराए पर बैंक खाता देना या कमीशन के लालच में लेनदेन करना कानूनी अपराध।
* किसी भी अनजान व्यक्ति/WhatsApp नंबर पर भुगतान न करें
* Google पर दिखने वाले हर नंबर पर भरोसा न करें
* सोशल मीडिया विज्ञापनों से सावधान रहें
* केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही बुकिंग करें
* भुगतान से पहले वेबसाइट URL अवश्य जांचें
* WhatsApp पर भेजे गए QR Code स्कैन न करें








