विक्रम शर्मा का ‘शिष्य’ अखिलेश सिंह कैसे ट्रांसपोर्टर से बन गया जमशेदपुर का बड़ा गैंगस्टर, पढ़िए उसकी पूरी कहानी

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झारखण्ड के जमशेदपुर में अपराध की दुनिया में बड़ा चेहरा माना जाने वाला गैंगस्टर विक्रम शर्मा अब इस दुनिया में नहीं रहा. लेकिन उसके नाम और उससे जुडे लोगों की चर्चा इन दिनों काफी तेजी से हो रही है. हो भी क्यों ना विक्रम शर्मा ने अपने अपराध का जाल कुछ यूं फैला रखा था कि जमशेदपुर पुलिस भी एक समय पर उससे पस्त हो चुकी थी. लेकिन उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में विक्रम शर्मा की हत्या के बाद अखिलेश सिंह और विक्रम शर्मा के बीच रिश्ते को लेकर काफी ज्यादा चर्चा हो रही है.भले ही विक्रम शर्मा की हत्या हुई है. लेकिन विक्रम शर्मा से ज्यादा गैंगस्टर अखिलेश सिंह के नाम की चर्चा इन दिनों जोरों पर है.फिलहाल अखिलेश सिंह दुमका जेल में बन्द है ऐसे में सभी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अखिलेश सिंह जिसके ऊपर 50 से ज्यादा अपराधिक मामले दर्ज है वो कैसे विक्रम शर्मा को अपना गुरु मानने लगा और कैसे वो अपराध की दुनिया का इतना बड़ा चेहरा बन गया उसका पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या है आज हम आपको उसकी पूरी कहानी बताएंगे।

अशोक शर्मा हत्याकांड में आया पहला नाम

अखिलेश सिंह नाम की चर्चा जमशेदपुर और झारखंड में उस समय तेजी से होने लगी जब साल 1998 में ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या हुई थी. इस हत्याकांड में विक्रम शर्मा के साथ अखिलेश सिंह का नाम भी उछला था. हालांकी सबूत के आभाव में अखिलेश सिंह बरी हो गया. आपको बता दे कि अखिलेश सिंह एक अच्छे पढ़े लिखे परिवार से आता है जिसके पिता झारखंड पुलिस में थे और पुलिस मेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके है. झारखंड की राजनीति में भी वह काफी ज्यादा सक्रिय थे लेकिन अब सवाल उठता है कि बेटा क्यों अपराध की दुनिया में आ गया।

पिता के पुलिस में होने के बावजुद बन गया गुंडा

अखिलेश सिंह की व्यक्तिगत पृष्ठभूमि के बारे में बात की जाए तो उसका परिवार काफी सुलझा हुआ था. पिता के पुलिस में होने की वजह से उसको भी काफी अच्छी परवरिश मिली. लेकिन बड़े होने के बाद अखिलेश सिंह ने बिजनेस करने के लिए ट्रांसपोर्ट का रास्ता चुना लेकिन साल 1998 में जब अशोक शर्मा हत्याकांड में उसका नाम सामने आया तो धीरे-धीरे उसने अपराध की दुनिया में अपना पैर पसारने शुरू कर दिए और बड़े-बड़े अधिकारियों के साथ करोबारियों से वसूली करने लगा. अब आपके मन में यह सवाल उठता होगा कि अचानक कैसे एक साधारण सा लड़का गैंगस्टर बन गया तो आपको बता दें कि अखिलेश सिंह के गैंगस्टर बनने की नीव तभी रख दी गई थी जब पहली बार वह विक्रम शर्मा से मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेने पहुंचा. विक्रम शर्मा ने अखिलेश सिंह को देखते ही भाप लिया था कि इस लड़के में वह सारी बातें है जो एक गैंगस्टर में होनी चाहिए. फिर क्या था वह धीरे-धीरे अखिलेश सिंह को इस्तेमाल करने लगा. अखिलेश सिंह को विक्रम शर्मा का साथ पसन्द था और वह उसे मन ही मन गुरु मान बैठा. जब अशोक शर्मा हत्याकांड में विक्रम शर्मा के साथ अखिलेश सिंह का नाम सामने आया तो इसके बाद से अखिलेश सिंह ने अपराध की दुनिया में पैर जमाना शुरू कर दिया।

कई दशकों तक गुरु-शिष्य की जोड़ी ने जमशेदपुर में राज किया

विक्रम शर्मा अखिलेश सिंह के गुरु-शिष्य की जोड़ी ने कई दशक तक झारखण्ड के जमशेदपुर में उत्पाद मचाया और एक के बाद एक बड़े-बड़े हत्या कांडों को अंजाम देने लगे.अखिलेश सिंह देखने में लंबा चौड़ा हट्टा खट्टा नौजवान था, वही स्वभाव से काफी उग्र था. अखिलेश सिंह अपनी ताकत के बल पर कुछ ही दिनों में जमशेदपुर का बड़ा गैंगस्टर बन जिस. विक्रम शर्मा उसको सिर्फ इशारा करता था और अखिलेश सिंह उस हत्याकांड को अंजाम दे देता था.साल 1998 के बाद जमशेदपुर में अखिलेश सिंह और विक्रम शर्मा का नाम का खौफ इस कदर था कि इसके नाम मात्र से ही बड़े-बड़े अधिकारी और करोबारी थर-थर कांपते थे।

इस तरह धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में अखिलेश सिंह ने जमाया पैर

साल 2001 यह वही साल था जब अखिलेश सिंह पर एक बार फिर जमशेदपुर के जुगसलाई निवासी ओमप्रकाश काबरा के अपहरण का आरोप अखिलेश सिंह पर लगा. हलांकी इस मामले में भी सबूतों के अभाव में अखिलेश सिंह को बरी कर दिया गया लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे अखिलेश सिंह की पहचान बड़ी होने लगी जिसका फ़ायदा अखिलेश सिंह को आगे मिलने वाला था. उसने यह भाप लिया था कि अब जमशेदपुर में उसकी पहचान बढ़ चुकी है और वह अपना दबदबा जमशेदपुर में कायम कर सकता है. अखिलेश सिंह ने बिल्कुल ऐसा ही किया और अपने गुरु विक्रम शर्मा के साथ मिलकर कई साल तक जमशेदपुर में अपराध का वह उत्पाद मचाया जिसको अब तक जमशेदपुर नहीं भूल पाया है।

झारखण्ड के जमशेदपुर के चर्चित आशीष डे हत्याकाण्ड में भी नाम

साल 2007, दो नवंबर का वह काला दिन जिस दिन साकची के आम बागान में श्रीलेदर्स के मलिक आशीष डे की हत्या कर दी गई. जहां खुलेआम उन पर फायरिंग की गई जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई. इस मामले में अखिलेश सिंह का नाम सामने आया. इसके पीछे मास्टरमाइंड विक्रम शर्मा था. साल 2008 साकची में ही रवि चौरसिया पर फायरिंग की गई. इसके साथ ही इस साल साकची में ही पूर्व जज रवि पर फायरिंग में अखिलेश सिंह का नाम था. इसके साथ ही 25 जुलाई 2008 को बिस्टुपुर में कांग्रेसी के कार्यलय पर फायरिंग. अखिलेश सिंह एक के बाद एक बड़े-बड़े हत्याकांडों को अंजाम देता गया. जिसके बाद उसकी पहचान जमशेदपुर के बड़े गैंगस्टर में होने लगी जिसका पूरा फायदा विक्रम शर्मा ने उठाया. और दोनों गुरु चेला अपराध के बादशाह बन गए।

जेल में रहने के बावजुद खौफ नहीं

आपको बता दें कि अखिलेश सिंह पर कुल 52 आपराधिक मामला दर्ज है. वहीं जेलर उमाशंकर पांडे और दरोगा अरविंद सिंह की हत्या कांड मामले में अखिलेश सिंह को उमर कैद की सजा सुनाई गई है. फिलहाल अखिलेश सिंह दुमका जेल में बंद है. लेकिन वहां से अपने गुर्गो के माध्यम से जमशेदपुर में अपना खौफ कायम रखा हुआ है. जेल में रहते हुए भी वह बड़े-बड़े अधिकारी और करोबारियों से पैसे की वसूली करता है।

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Author: The7news

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